त्राटक योग की एक प्राचीन ध्यान विधि है, जिसमें किसी बाहरी वस्तु पर बिना पलक झपकाए दृष्टि केंद्रित की जाती है। यह मन की चंचलता दूर करने, एकाग्रता बढ़ाने और नेत्र स्वास्थ्य सुधारने में सहायक है। इसके अलावा जो लोग सम्मोहन या वशीकरण, पूछा देखना, पर्चा बनाना, तंत्र उपचार के क्षेत्र में हैं उन्हें भी त्राटक का प्रयोग करना चाहिए
त्राटक आपकी आंखो में वो जान और तेज दाल सकता हैं की हर कोई आपकी दृष्टि से प्रभावित होता हैं … आपके सामने आते ही दबने लगता हैं … अक्सर हीलिंग और थरेपी करने वाले लोग भी त्राटक से ही आगे का रास्ता तय करते हैं… इसी माध्यम से वो अपने थर्ड आई चक्र को जागृत कर पाते हैं …
चाहे मन्त्र मार्ग हो योग मार्ग हो तंत्र मार्ग हो या वैज्ञानिक तकनीक के उपचार हिप्नोटिज्म सबमे त्राटक का अहम रोल होता ही हैं … क्योंकि जब तक आपकी आंखो में आकर्षण, तेज और ठहराव नहीं होता आप दुसरे का इलाज भी नहीं कर पाएंगे …. जाहिर सी बात हैं जब तक खुद सक्षम नहीं होंगे दुसरे को क्या ही शांति दे पाएंगे …
त्राटक का अर्थ
त्राटक का शाब्दिक अर्थ है किसी विशेष दृष्य को टकटकी लगाकर देखना। यह हठयोग प्रदीपिका में षट्कर्मों में से एक शुद्धिकरण तकनीक के रूप में वर्णित है, जहाँ छोटे चिह्न पर दृष्टि तब तक जमाई जाती है जब तक आँसू न बहने लगें। उसके बाद थोडा आराम करके फिर से नजर वही गड़ा दी जाती हैं … ऐसे नियमित 41 दिन का अभ्यास किया जाता हैं ..
करने की विधि
आरामदायक आसन जैसे सुखासन या पद्मासन में बैठें, कमर सीधी रखें। मोमबत्ती या दीपक की लौ को आँखों के स्तर पर 2-3 फुट दूरी पर रखें, जहाँ लौ स्थिर हो। आँखें खोलकर बिना पलक झपकाए लौ पर 10-15 सेकंड तक देखें, फिर आँखें बंद कर भौंहों के मध्य में उसकी छवि का ध्यान करें जब तक वह नष्ट न हो जाए। प्रक्रिया 3-4 बार दोहराएँ, समय धीरे-धीरे बढ़ाएँ।
अभ्यास के बाद अपनी आंखो व पलको को शीतल जल से ठंडा करे ,,, पर आंखो को बिलकुल भी मसलना नहीं हैं …. सिर्फ पानी के साथ भिगोकर ठंडा करना हैं …अभ्यास में आंखो पर ज्यादा दबाव न बनाये … बिलकुल सामान्य रहकर प्रयोग को आगे बढ़ाये
मुख्य लाभ
सामान्य व्यक्ति के लिए प्रभाव:
यह नेत्र रोग, थकान, आलस्य दूर करता है तथा एकाग्रता, स्मृति और आध्यात्मिक विकास में सहायक है। नियमित अभ्यास से मन शांत होता है और आज्ञाचक्र जागरण में मदद मिलती है।
साधक के ऊपर प्रभाव:
- साधक का मन एक बिंदु (केंद्र) पर स्थिर होना शुरू होता हैं
- आंखो में दिव्य तेज का प्रसार बढ़ता हैं
- वशीकरण और सम्मोहन में इस्तेमाल होता हैं
- साधक का औरा क्लीन होकर बेहद मजबूत बनता हैं
- दिव्य दृश्य और देवताओ के दर्शन लाभ होता हैं
- निरंतर अभ्यास से उसका आसन भी सिद्ध हो जाता हैं
- वह भुत भविष्य वर्तमान के घटना देखना शुरू करता हैं
- आज्ञा चक्र सक्रिय होने लगता हैं

त्राटक से एकाग्रता कैसे बढ़ती है
त्राटक मन की चंचलता को नियंत्रित कर एकाग्रता बढ़ाता है, क्योंकि इसमें बाहरी वस्तु पर दृष्टि स्थिर रखने से मन भटकना बंद हो जाता है। यह षट्कर्मों में शामिल शुद्धिकरण तकनीक है जो नेत्रों और मस्तिष्क को मजबूत बनाती है।
एकाग्रता कैसे बढ़ेगी
त्राटक में मोमबत्ती की लौ या बिंदु पर बिना पलक झपकाए देखने से बाह्य और आंतरिक दृष्टि एक बिंदु पर केंद्रित होती है, जिससे विचारों का बिखराव रुकता है। आँखें बंद करने पर उसकी छवि पर मानसिक ध्यान रखने से धारणा शक्ति विकसित होती है, जो समाधि तक ले जाती है।
वैज्ञानिक आधार
यह आँखों की मांसपेशियों को व्यायाम देता है, जिससे फोकस क्षमता बढ़ती है और तनाव कम होता है। नियमित अभ्यास से आज्ञाचक्र सक्रिय होता है, अंतर्ज्ञान और स्मृति मजबूत होती है।
अभ्यास टिप्स
प्रति दिन 10-15 मिनट करें, मन भटके तो श्वास पर लौटें। छात्रों, तांत्रिको और पेशेवरों के लिए विशेष उपयोगी साबित हुआ हैं …