सिद्ध काली कवच ताबीज: शक्ति का दिव्य रक्षा कवच: मित्रों आपने अक्सर अपने जीवन में अलग अलग मौको पर देखा ही होगा कि कोई व्यक्ति अपने हाथ पर, गले में या फिर पेट पर कोई ताबीज या यंत्र बांधकर रखता हैं … अक्सर लोगों के घरो उनके दुकान पर भी ऐसे ही कवच या किसी लाल या काले कपड़े में बांधकर कुछ लटकाया रहता हैं …
अनेक लोगो के घर के मन्दिर या तिजोरी में भी ऐसे हि सामग्री रखी मिलती हैं … तो यह सब है क्या ?…. यह एक तरह का यंत्र शास्त्र कहे या फिर हमारे जीवन को सकारात्मक बनाने के लिए किये जाने वाले उपाय ….. मजे की बात ये हैं कि हर धर्म के लिए बेशक हिन्दू, मुस्लिम, सिख, बोद्ध जैन या इसाई लोग हैं … सब इन दिव्य और पवित्र चीजों का इस्तेमाल करते हैं
माँ काली का सिद्ध कवच ताबीज तांत्रिक परंपरा की एक शक्तिशाली रक्षा विधि है, जो भक्तों को नकारात्मक ऊर्जा, शत्रु बाधा और संकटों से बचाता है। यह भोजपत्र पर लिखा गया सिद्ध मंत्र चांदी के ताबीज में धारण किया जाता है, जो माँ काली की कृपा से जीवन में विजय और सुरक्षा प्रदान करता है।
काली कवच का महत्व
काली कवच ब्रह्म वैवर्त पुराण से लिया गया मंत्ररूपी कवच है, जो शिव द्वारा विष्णु को बताया गया। यह साधक के चारों ओर अदृश्य सुरक्षा घेरा बनाता है, शत्रुओं की साजिश, तंत्र-मंत्र और वायव्य बाधाओं को निष्फल करता है। तांत्रिक साधना में यह सिद्धि प्राप्ति में सहायक है, आभामंडल को मजबूत कर आकर्षण और प्रभावशीलता बढ़ाता है।
तन्त्र से पीड़ित लोग अपने बचाव के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं
सिद्धि की विधि
शुभ मुहूर्त में गणपति पूजन कर भोजपत्र पर गोखरू कलम से काली मंत्र लिखें। 1 लाख जप से सिद्ध करें, फिर अभिमंत्रित कर ताबीज में रखकर गले या बांह में धारण करें। संकल्प लें: “महाकाली कृपा से भय, रोग व शत्रु नाश हेतु धारण कर रहा हूँ।” महिलाओं व बच्चों के लिए विशेष लाभकारी साबित होता हैं।
काली कवच ताबीज कैसा होता है 🧿
काली कवच ताबीज आमतौर पर माँ काली की शक्ति से जुड़ा एक तांत्रिक सुरक्षा ताबीज माना जाता है। इसे साधना या रक्षा के उद्देश्य से बनाया और पहना जाता है।
- अक्सर तांबे, चांदी या भोजपत्र पर बनाया जाता है।
- इसमें काली यंत्र या विशेष बीज मंत्र लिखे होते हैं।
- इसे मोड़कर छोटे ताबीज (लॉकेट) में बंद कर दिया जाता है।
- आमतौर पर काले या लाल धागे में पहनाया जाता है।
ताबीज के अंदर क्या लिखा होता है
अक्सर इसमें ये चीजें लिखी जाती हैं:
- काली यंत्र
- माँ काली का बीज मंत्र:
“ॐ क्रीं कालिकायै नमः” - कभी-कभी तांत्रिक सुरक्षा मंत्र या कवच श्लोक भी लिखे जाते हैं।
इसे कैसे पहना जाता है
- मंगलवार, शनिवार या अमावस्या को पहनना शुभ माना जाता है।
- पहले दीपक या अगरबत्ती जलाकर माँ काली का स्मरण किया जाता है।
- उसके बाद ताबीज को गले या बाजू में बांधा जाता है।
- पहनते समय मन ही मन “ॐ क्रीं कालिकायै नमः” मंत्र बोलना अच्छा माना जाता है।
कुछ सावधानियाँ ⚠️
- ताबीज को जमीन पर नहीं रखना चाहिए।
- इसे किसी और को पहनने नहीं देना चाहिए।
- अगर ताबीज टूट जाए या खुल जाए तो उसे नदी या पेड़ के नीचे सम्मान से रख देना चाहिए।