tantra sadhana me sawdhani

तंत्र साधना शुरू करने से पहले किन 7 बातों का ध्यान रखना चाहिए

मित्रों हम अक्सर अपने जीवन में कोई न कोई साधना करते ही रहते हैं … चाहे साधना भक्ति मार्ग की हो या सांसारिक स्तर की … लेकिन समस्या तब पैदा होती हैं जब हम बिना सही मार्गदर्शन और सही गुरु के कोई भी साधना उठा लेते हैं …. ऐसा करके हमे लाभ हुआ के नही पता नहीं पर हम कई बार नेगेटिव एनर्जी के हत्थे चढ़ जाते हैं …

चाहे आपने किताब से पढकर कोई मंत्र साधना की है या youtube से देखकर कोई भी उचित अनुचित क्रिया आप करते हो … जैसे जिन्न साधना, परी, अप्सरा, यक्षिणी, पिशाचनी या कोई और समसान की साधना …. उससे अनेक लोगों को समस्या का सामना करना पड़ा हैं …इसलिए थोडा सम्भल कर आगे बढिए.. क्योंकि यह न केवल आपकी बल्कि आपके आसपास के लोगों की लाइफ भी बर्बाद कर देता हैं ….

तंत्र साधना भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का एक गहरा और रहस्यमय मार्ग माना जाता है। यह साधना केवल बाहरी क्रियाओं तक सीमित नहीं होती, बल्कि मन, ऊर्जा और चेतना के स्तर पर काम करती है। इसलिए तंत्र साधना शुरू करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

1. योग्य गुरु का मार्गदर्शन लें

तंत्र साधना में सही मार्गदर्शन बहुत महत्वपूर्ण होता है। किसी अनुभवी गुरु के निर्देशन में साधना करने से गलतियाँ होने की संभावना कम हो जाती है और साधक को सही दिशा मिलती है। पर दुर्भाग्य से आजकल अनुभवी गुरु मिलना बहुत मुश्किल हो गया हैं … गुरु कम घंटाल ज्यादा मिलते हैं ….

जिन्होंने आज तक खुद कोई साधना सफलतापुर्वक नहीं की हैं ,,, वो लोग आजकल ऑनलाइन ऑफलाइन साधनाए करवा रहे हैं …. और साधनाए भी छोटी मोटी नहीं बल्कि उच्च लेवल की साधना … जैसे बगलामुखी, दश महाविद्या, त्रिपुर सुन्दरी ,आदि आदि

ऐसी स्थितियों में आपका समय भी व्यर्थ जाता हैं और पैसा भी …. क्योंकि साधना के बाद भी आपको लगता हैं कि आप खाली के खाली ही हैं … कुछ नया जुड़ा नहीं हैं अनुभव में ….. इसलिए सबसे जरूरी हैं गुरु का अनुभवी होना और शक्तिशाली होना भी … ताकि आपको अच्छा मार्गदर्शन तो मिले ही… साथ में आपकी रक्षा भी अच्छे से हो पाए …

गुरु ऐसा होना चाहिए जो आपकी मेसेज का रिप्लाई देता हो … महीने में एक बार कल पर भी बात हो सकते … तीन चार महीने में एक बार अकेले में मुलाकात भी हो सके… ये नहीं कि गुरु तो बहुत बड़े बनाये हो पर बात साल भर तक एक मिनट के लिए भी न हो पाती हो …

2. साधना का उद्देश्य स्पष्ट रखें

तंत्र साधना का उद्देश्य केवल भौतिक लाभ या चमत्कार नहीं होना चाहिए। इसका मुख्य लक्ष्य आत्मिक विकास, मन की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति होना चाहिए। लेकिन आजकल लोगों की सोच बन गई हैं कि एक बार किसी तरह से शक्ति मिल जाये फिर देख लूँगा सबको…

यह सोच एक मानसिक बीमारी की तरह आपको रोगी बना देती हैं … क्योंकि तंत्र कहता हैं जितना हो सके कल्याण करो … बुरा मत करो किसी का भी … चाहे दोस्त हैं या दुश्मन … एक तांत्रिक के लिए सब बीमार लोग दया के पात्र होने चाहिए … उसको क्षमा करना आना चाहिए … बदले की भावना रखने वाला कोई भी व्यक्ति तांत्रिक के पद से गिर जाता हैं …

3. मानसिक और शारीरिक तैयारी

मित्रों यह बात अपने पल्ले गांठ बांध लो कि साधना के लिए साधक का मन शांत और शरीर स्वस्थ होना जरूरी है। यदि मन बहुत अशांत या तनावग्रस्त हो, तो साधना में एकाग्रता बनाना कठिन हो जाता है। उसी तरह यदि उसके शरीर में रोग हैं, दर्द हैं तो भी वह साधना करने में सक्षम नहीं हो पायेगा

अस्वस्थ व्यक्ति जिसको दर्द हैं कमजोरी हैं वह कैसे एकाग्र हो सकता हैं … बार बार उसका ध्यान उसके दर्द पर जायेगा … इसलिए किसी भी साधना के दौरान आपको स्वस्थ होना बहुत जरुरी हैं … इसलिए ज्यादा तला भुना मसाले वाला ,,, कम ऊर्जा वाला पैकेट में रखा बासी भोजन न करे

मन को स्थिर रखने का प्रयास करे … लम्बे और गहरे श्वास लेने की आदत डाल ले … जितने लम्बे और धीमे श्वास लेंगे .. मन उतना ही जल्दी स्थिर होने लगता हैं … किसी भी साधना का मूल उदेश्य यही होता हैं कि आपका मन विचार शून्य हो जाये …. भले ही कोई मार्ग आपका हो … इसमें आप त्राटक और रिलेक्सिंग म्यूजिक का भी मदद ले सकते हैं … जैसे योग निद्रा अभ्यास

4. नियम और अनुशासन का पालन करें

अगर आप सोचते हैं कि तंत्र साधना कोई हलवा बनाने का काम हैं, कि आटा गर्म किया, चीनी मिलाई और पानी डालकर भुन लिया तो आप ग़लतफ़हमी में हैं, तंत्र बेहद गुप्त प्रक्रिया हैं …. इसको बड़ी ही सावधानी से किया जाता हैं, न कि लापरवाही करनी चाहिए …

तंत्र साधना में नियमितता, समय का पालन, शुद्धता और संयम का बहुत महत्व होता है। इन नियमों का पालन करने से साधना अधिक प्रभावी बनती है।

5. धैर्य रखें

कुछ लोग सोचते हैं कि गुरु को कोई दक्षिणा देकर अगर आप सोचते हैं कि आपको चुटकी बजाते ही चमत्कार हो जायेगा.. तो ऐसे लोगों को कही कुछ नहीं मिलता हैं … अगर आप सोचते हैं हथेली पर सरसों हरी भरी हो जाये और चार दिन की साधना से आपको दिव्य शक्तियों की प्राप्ति हो जाएगी तो आप मुर्खता कर रहे हैं ….

तंत्र साधना तुरंत परिणाम देने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसमें समय, समर्पण और धैर्य की आवश्यकता होती है। इसलिए जल्दी परिणाम की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। क्योंकि आपकी यही जल्दी आपको खतरे में भी डाल सकते हैं …. अनेक ऐसे उदाहरण हैं जहाँ लोग अपनी ही गलती के कारण बड़े संकट में फंस जाते हैं …

6. सही मंत्र और विधि का चयन

हर साधना और मंत्र हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता। इसलिए साधना शुरू करने से पहले सही मंत्र और विधि का चयन करना आवश्यक है।

7. सकारात्मक और पवित्र सोच रखें
तंत्र साधना में मन की अवस्था बहुत महत्वपूर्ण होती है। यदि साधक की सोच सकारात्मक और पवित्र हो, तो साधना का प्रभाव अधिक अच्छा होता है।

अंत में, तंत्र साधना एक गहन आध्यात्मिक यात्रा है। यदि इसे सही मार्गदर्शन, अनुशासन और श्रद्धा के साथ किया जाए, तो यह साधक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। लेकिन बिना समझ और तैयारी के इस मार्ग पर चलना उचित नहीं माना जाता। 🙏✨