gogaji ka chabuk

भगतावल में चाबुक क्या होता हैं?

भगतावल परंपरा में चाबुक एक पवित्र व शक्तिशाली प्रतीक है। यह लोहे की जंजीर या सांकल से बना चाबुक होता है, जिसे भगत देवता की सवारी के समय पीठ पर मारते हैं। आपने ऐसा अक्सर वीर और पीर दोनों परम्परा में देखा होगा … चाबुक यानि कोड़ा अधिकतर शक्तिपात करने और भुत प्रेत हटाने के लिए किया जाता हैं ..

अक्सर जो लोग गद्दी दरबार चलाना या फिर झाड़ा लगाने का काम करते हैं वो इसे रखते हैं … कुछ लोग जो सिद्ध गुरु जी के शिष्य हैं वो अपने घर परिवार की रक्षा के लिए भी चाबुक को अपने पूजा स्थान पर रखते हैं .. .. क्योंकि जहाँ चाबुक हो वहां नेगेटिव ऊर्जा का प्रभाव कम पड़ता हैं …

चाबुक क्या है?

भगतावल (राजस्थान विशेषकर गोगामेड़ी, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल/उत्तराखंड क्षेत्रीय लोक-तांत्रिक भक्ति) में चाबुक भगतों का प्रमुख उपकरण है। यह लोहे का कड़ा व सांकल युक्त चाबुक देवताओं (जैसे नाहर सिंह, केसरमल बावरी) का प्रतीक है। इसे 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास माना जाता है।

उपयोग व महत्व

  • सवारी के समय: देवता भगत के शरीर पर आते समय चाबुक पीठ पर मारते हैं ताकि शरीर पूर्ण शक्ति ग्रहण करे व बंधन टूटें।
  • रक्षा व उतारा: रोग-दोष, भूत-प्रेत, नकारात्मक शक्तियों का नाश; हाजरी बुलाने या काटने के लिए।
  • हुंकार: चाबुक चलाना देवताओं की शक्तियों को हाजिर करने व वचन सत्य करने का संकेत।

चाबुक की प्रमुख शक्तियां

भगतावल परंपरा में चाबुक की शक्ति अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। यह लोहे की सांकल या जंजीर वाला चाबुक देवताओं की हुंकार, रक्षा कवच और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने का प्रतीक है।

  • रक्षा कवच: भगत की पीठ पर मारने से शरीर के बंधन टूटते हैं, नकारात्मक शक्तियां नष्ट होती हैं, वीरों-पीरों की शक्ति सक्रिय होती है।
  • हुंकार व हाजरी: अखाड़े में चाबुक चलाने से 5 कोष की विद्या (भूत-प्रेत, काली विद्या) हाजिर होती है, देवता वचन सत्य करते हैं।​
  • रोग-दोष नाश: चाबुक से उतारा करने पर रोग, संकट, भूत बाधा भस्म हो जाती है; भगत के घर-परिवार की रक्षा।
  • सवारी पूर्णता: देवता सवारी के समय चाबुक मारकर भगत के शरीर को पूर्ण शक्ति प्रदान करते हैं, अन्यथा वचन झूठे पड़ सकते हैं।​
  • शक्तियां हाजिर: चाबुक में 33 कोटि देवी-देवताओं की शक्तियां निवास करती हैं, जो सिद्ध होने पर भूत प्रेत भस्म कर देती हैं।​

चाबुक जितना जोर से चलता है, उतना ही भगत का कल्याण होता है – बंधन टूटते हैं, शत्रु शक्तियां भागती हैं। यह नाथ चिमटे जैसा ही तांत्रिक अस्त्र है।

चाबुक से भूत प्रेत भगाने की विधि

भगतावल परंपरा में सिद्ध चाबुक से भूत-प्रेत भगाने की विधि अत्यंत प्रभावी मानी जाती है। केवल योग्य भगत ही कर सकते हैं; सामान्य व्यक्ति न करें।

पूर्व तैयारी

  • चाबुक सिद्ध हो (गुरु दीक्षा से); भगत देवता सवारी में हो।​
  • पीड़ित को भगत के समक्ष लाएं, स्वच्छ स्थान पर धूनी जलाएं।​

भूत-प्रेत भगाने की विधि

  1. हुंकार भरना: भगत चाबुक हवा में जोर से फेंकें/चलाएं, देवता नाम लें (जैसे “नाहर सिंह देवता हाजिर हो!”)।​
  2. स्पर्श उतारा: चाबुक पीड़ित के ऊपर से 7-11 बार उतारें, पीठ/सिर पर हल्के मारें। देवता हुंकार भरें।
  3. घेरा बनाना: चाबुक जमीन पर घेरा बनाकर पीड़ित को बीच रखें, चाबुक चलाकर फूंक मारें।​
  4. वचन लेना: देवता चाबुक से मारते हुए भूत को हाजिर होने को कहें, नाम पूछें व भस्म करें।​
  5. समापन: पीड़ित को ताबीज दें, हवन कराएं।​

सावधानियां

  • बिना सिद्ध चाबुक/भगत न करें; इससे प्रतिकूल फल भी मिल सकता हैं।​
  • चिकित्सा जांच पहले जरुर करवा ले।

पूजा व रखरखाव

  • चाबुक को स्नान, पूजन कर गद्दी पर रखा जाता है; बिना चाबुक की गद्दी अधूरी मानी जाती हैं।
  • भगत इसे संभालकर रखते हैं, क्योंकि इसमें वीरों-पीरों की शक्तियां विद्यमान होती हैं।

यह नाथ/अघोर परंपरा से प्रेरित चिमटे जैसा ही है, लेकिन भगतावल में विशिष्ट।

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