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माता शीतला की साधना विधि क्या है?

माता शीतला की साधना रोग निवारण व आरोग्य के लिए की जाती है। यह सात्विक तांत्रिक साधना है, गुरु मार्गदर्शन अनिवार्य। क्योंकि अधिकतर लोग इधर उधर से पढकर youtube देखकर कोई भी साधना उठा लेते है….. और बाद में बोलते हैं हमे कोई अनुभव नही हुआ … अगर ऐसा ही आपके साथ भी होता हैं तो आप योग्य गुरु के आदेश से साधना करे

सामान्य पूजा विधि (शीतला अष्टमी/सप्तमी)

सामग्री

  • कंडवे (मिट्टी का कुल्हड़), नीम पत्ती, ठंडे प्रसाद (मुरमुरा खीर, रोटी बिना तवे पर), रोली, हल्दी, सिंदूर, लौंग, कपूर।

चरण

  1. बासौड़ा व्रत: छठी/सप्तमी को ठंडा भोजन बनाकर अगले दिन गर्म न पकाएं।​
  2. पूजन: सुबह ठंडे जल स्नान, लाल वस्त्र धारण। माता प्रतिमा/यंत्र स्थापित, रोली टीका, वस्त्र चढ़ाएं।
  3. भोग: बासी/ठंडा प्रसाद अर्पित (चूल्हा न जलाएं), आरती करें।
  4. प्रदक्षिणा: मंदिर जाएं या घर में, जल छिड़कें।

तांत्रिक साधना (7-21 दिन)

  • आरंभ: मंगलवार/शुक्रवार, नीम पेड़ नीचे, लाल आसन, रुद्राक्ष माला।​
  • मंत्र जपॐ श्रीं श्रीं शीतलायै नमः या ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः – 11 माला रोज।​
  • हवन: जप के 1/10 भाग घी/लौंग से।​
  • समापन: 7 लौंग हवन, नीम जलार्पण।​

सावधानियां

  • शुद्ध भोजन करे , ज्यादा तला हुआ मसालेदार खाने से बचे।​
  • रोगी व गरीब लोगों की सेवा पर जोरदें।

माता शीतला चेचक, बुखार व संक्रामक रोगों की अधिष्ठात्री हैं, जो शुद्धता व भक्ति वाले भक्तों को विशेष रूप से पसंद करती हैं। वे सात बहनों में एक हैं (ऋणिका, घृर्णिका आदि) व गधे पर सवार।

किन भक्तों को पसंद

  • रोगी व बच्चों के माता-पिता: चेचक, खसरा, त्वचा रोग, बुखार से पीड़ित या बच्चों के स्वास्थ्य चाहने वाले।
  • शुद्ध व्रतधारी: शीतला अष्टमी/सप्तमी पर ठंडे/बासी भोजन (बासोड़ा) खाने वाले, आग न जलाने वाले।
  • नीम प्रेमी: नीम पत्ती पूजा करने वाले; स्वच्छता, शीतलता अपनाने वाले।
  • गृहस्थ भक्त: संतान सुख, दीर्घायु, कल्याण चाहने वाले; जाट, अहीर, गुर्जर, राजपूत, ब्राह्मण आदि कुलदेवी मानने वाले।

प्रसन्न करने के उपाय

  • ठंडे पकवान भोग (मुरमुरा प्रसाद), लाल चुनरी चढ़ाएं।
  • शीतला मंदिर में मुंडन/विवाह जात लगाएं।

सात बहनों के नाम

माता शीतला को सात बहनों के रूप में पूजा जाता है। ये बहनें विभिन्न रोगों की अधिष्ठात्री हैं और शीतला माता के साथ निवास करती हैं।​

क्रमांकनामरोग निवारण youtube+1
1वृद्ध माता (खासी माता)खांसी व श्वास रोग
2बड़ी माता (ग्राम देवी)बड़ी चेचक
3फूलमती मातानेत्र रोग
4लूता विष हारिणी (लता विषहरिणी)मकड़ी विष फुंसियां
5जालपा देवीपीलिया, छाले, दाग
6खुजली देवीफोड़ा, फुंसी, खाज
7छोटी माता (दुलारी)छोटे रोग

कुछ परंपराओं में: ऋणिका, घृर्णिका, महला, मंगला, शीतला, सेठला, दुर्गा।