पितृ पक्ष के 16 दिनों में पितरों की शांति और संतुष्टि के लिए बताई गई सरल विधि। इस पोस्ट में आवश्यक सामग्री, मंत्र, संकल्प और पूरी प्रक्रिया क्रम से दी गई है।
ओम नमो आदेश शिव गोरख शिव गोरख…. तो प्रेमी भक्तजनों आज के Post में हम आपको बताएंगे कि यदि आपके घर के आपके पूर्वज आपके कुल के लोग, प्रेत योनि में पड़े हैं या फिर आपके पितर असंतुष्ट हैं, नाराज चल रहे हैं, कमजोर हैं। आपकी मदद नहीं कर पा रहे। ऐसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिए? ऐसी स्थिति में यह मैं आपके लिए बना रहा हूं क्योंकि अभी पितृ पक्ष शुरू होने वाला है।
26 से स्टार्ट हो जाएगा और 10 अक्टूबर तक यह चलेगा। तो इन 16 दिनों में आप अपने पितरों को पूर्ण रूप से मुक्ति प्रदान करवा सकते हैं। प्रेत योनि से उन्हें पितर लोक में भेज सकते हैं। यदि वह असंतुष्ट हैं, नाराज हैं, दुखी है, कमजोर है, भूखे हैं तो आप उनको पूरी तरह से संतुष्ट भी कर सकते हैं।
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तो, इसके लिए आपको क्या करना होता है? इसके लिए मैं एक छोटी सी आसान सी विधि आपको दे रहा हूं जिसको आप अपने घर से ही कर सकते हैं। बड़ी आसानी से ही कर सकते हैं। इस विधि के लिए आपको कुछ चीजों की जरूरत पड़ेगी जो मैं बता देता हूं। इसमें आपको चार रुमाल लेने होते हैं। रुमाल रुमाल आप समझते हैं।
सफेद रंग के चार रुमाल ले लेने हैं। चार ही आपको भोज पत्र ले लेने हैं। इतने इतने से टुकड़े भोज पत्र के ले लेंगे। ठीक है जी? रुमाल हो गए चार, भोज पत्थर हो गए चार। एक दीपक इसमें रहेगा मिट्टी का दीपक जिस पर आपको चौमुख दीपक जलाना है। चौमुख दीपक इस पर जलेगा।
इसके अलावा आपको चार तरह का अनाज की जरूरत पड़ेगी। इसमें आप गेहूं, चावल, बाजरा, ज्वार इस तरह से चार तरह का अनाज ले सकते हैं। यह सामग्री आपको कर लेनी है।
पितृ पक्ष में पितरों की शांति और मुक्ति के लिए 16 दिन की सरल विधि
अब आपको करना क्या है? पहले पितृ पक्षी आपको इन चारों भोज पत्र पर सभी के ऊपर उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम लिख देंगे। यानी एक भोज पत्र पे उत्तर दूसरे पे दक्षिण तीसरे पे पूर्व चौथे पे पश्चिम यह लिख देंगे।
अभी इस भोज पत्र पर आपको उन पूर्वजों के नाम लिखने हैं जिनकी अकाल मृत्यु हुई है या फिर उनकी मृत्यु हो चुकी है और आपको लगता है कि वह प्रेत योनि में है, दुखी है, कमजोर है। इन सभी भोज पत्रों पर उनके आपको नाम लिख देने हैं।
मान लीजिए तीन लोग आपके परिवार में अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए हैं। आपके चाचा है, कोई ताऊ है, कोई दादा की पीढ़ी में है, कोई आपके भाई है या फिर आपकी संतान में से कोई अकाल मृत्यु पर गया। तीन लोग हैं। जैसे भोज पत्र पर आपको नाम लिखना है प्रत्येक सदस्य का। नंबर एक राम सिंह, नंबर दो राहुल। नंबर तीन संजू।
इस तरह से यदि स्त्री है तो स्त्री का नाम लिख सकते हैं। श्रद्दा, शारदा, प्रभा जो भी नाम है आपको इन चारों भोज पत्र पर लिख लेना है।
अब इन चारों भोज पत्र पर सभी सदस्यों के आपने नाम लिख लिए। आपको नीचे यह भी लिख लेना है कि जो अज्ञात है, जिनका हमें पता नहीं है, जिनको हम जानते नहीं, उसी भोज पत्र पर उसका नाम भी रख लें।
अब यह लिख लेने के पश्चात अब कुछ लोग कहेंगे कि गुरु जी लिखे कैसे? तो मैं कहता हूं आप कुमकुम से लिख सकते हैं। सिंदूर से लिख सकते हैं। चंदन से लिख सकते हैं। इन चीजों से आप लिख सकते हैं।
आप लिख के नाम सभी के चारों पर उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम लिख के सभी भोज पत्र को एक-एक रुमाल पर रख लेना है और उसकी गांठ बंद कर लेनी है। यह हो गया। यह आपको रखना है। अपने पूजा स्थल साधना स्थल किसी सात जगह पर जहां आप घर में साधना करते हैं। इन चारों को रख लीजिए। एक इस दिशा में एक इस दिशा में एक इस दिशा में एक इस दिशा में।
मान लीजिए इस भोज पत्र पर उत्तर लिखा है तो इसको उत्तर दिशा में रखेंगे। पूर्व लिखा पूर्व दिशा में दक्षिण पश्चिम चारों को रख लेना है।
इसके बीच में वह मिट्टी का दीपक रख लेना है। जिसके भीतर आपको चार जोत यानी चौमुख दीपक होता है। आपको पता ही होगा चौमुख दीपक वह आपको जला लेना है। इस दीपक के भीतर आपको चार लौंग छोड़ देनी है। चार ही काली उड़द के दाने छोड़ने हैं। चार दाने काली उड़द चार ही लौंग। इस दीपक को आपको जला लेना है।
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एक पानी का गिलास आपको रख लेना है। उसमें दो चुटकी आपको चीनी, मीठा डाल लेना है। शुगर, शक्कर जो कुछ भी आपकी भाषा में कहते हैं। एक चुटकी आपको जो चार अनाज थे उसमें से एक चुटकी वो डाल लीजिए। चार अनाज की एक मीठे की चुटकी डाल लीजिए।
इस गिलास को सबसे पहले हाथ में पकड़िए और प्रार्थना कीजिए। संकल्प लीजिए कि मैं मेरा यह नाम है। मेरे पिता का यह नाम है। मेरा यह गोत्र है। मैं इस जगह का रहने वाला हूं। मैं आज संकल्प लेता हूं कि पितृ पक्ष के 16 दिन तक अपने पितरों की मुक्ति के लिए जो प्रेत योनि में है उनकी प्रेत योनि से मुक्ति के लिए जो नाराज है उनकी संतुष्टि के लिए शांति के लिए मैं यह साधना करूंगा। इस साधना में मुझे आज्ञा और आशीर्वाद दीजिए।
इस तरह से आपको वह कर लेना है। फिर आपको इससे छींटा देना है चारों रुमाल पे। इसी पानी से छींटा दे देंगे। एक छींटा दीपक के ऊपर दे देंगे। इसमें थोड़ा सा गंगाजल मिला लेंगे तो और बेस्ट है। अब इस पानी को वही रख दीजिए।
अभी आपको करना क्या है? जो मंत्र मैं बता रहा हूं यह पितरों की मुक्ति का मंत्र है। इसको मैं इसके मूल रूप में भी बताऊंगा और हिंदी इसका सरलार्थ क्या होता है? हिंदी में इसका अर्थ क्या होता है? वह भी बताऊंगा।
ॐ ह्रीं पितृभ्यः ज्योतिर्मुक्तिं देहि स्वधा॥
हिंदी अनुवाद इसका क्या है? वह भी मैं बता देता हूं। 21 बार पहले मंत्र जाप करेंगे। फिर 21 बार सरल भावार्थ भी बोलेंगे हिंदी में।
सरल भावार्थ क्या है?
हे हमारे समस्त पितृग दिव्य प्रकाश की ओर आपकी गति हो। आपको शांति बंधनों से मुक्ति और सद्गति प्राप्त हो। हे हमारे समस्त पितृग दिव्य प्रकाश की ओर आपकी गति हो। आपको शांति, बंधनों से मुक्ति और सद्गति प्राप्त हो।
21 बार ही यह सरल अर्थ बोलना है। हिंदी वाला 21 बार ही मंत्र जाप करना है।
तो मंत्र यदि समझ गए हैं तो हम आगे की बात करते हैं। मंत्र को आपको 21 बार जाप करना है। 21 बार ही इसका हिंदी अर्थ आपको बोला है। पहले मंत्र जाप करेंगे 21 बार। फिर 21 बार इसका हिंदी अर्थ बोलेंगे।
यह कर लेने के पश्चात अब आपको क्या करना है? इस पानी के गिलास से आपको सूर्य भगवान को जल दे देना है। और नया गिलास भर के वहीं रख देना है। 16 दिन तक यह पानी का गिलास ऐसे ही रखा रहेगा।
एक पानी का गिलास है। उसमें थोड़ा सा गंगाजल मिलाइए। एक चुटकी चीनी, एक जो अनाज है इकट्ठे उसकी एक चुटकी। यह वहीं रखा रहेगा पितरों के लिए जल ग्रहण करने के लिए।
दूसरा वह चारों रुमाल रखे रहेंगे। बीच में दीपक रहेगा चार मुखा दीपक। यह आपको करना है। प्रतिदिन के प्रतिदिन यह करते चले जाएंगे।
इसके अलावा अब जो आपको चार अनाज मैंने बोले थे गेहूं, चावल, बाजरा, ज्वार। इसमें आप चना भी डाल सकते हैं। चने की दाल हो तो मूंग की दाल हो तो थोड़ी सी और डाल लीजिए। जो भी हो चार तरह के अनाज बना लीजिए।
अब आपको जब मंत्र जाप कर लेंगे तब आपको ये दो मुट्ठी ये अनाज ले लेना है। सांझा अनाज ले लेना है। यह मिक्स अनाज ले लेना है। इसको दो मुट्ठी ले लेंगे।
इसको अपने ऊपर से सात बार सीधा घुमाना है। आपको सीधा क्योंकि संकल्प आपने लिया है इसलिए आपके ऊपर से ही घुमाना पड़ेगा। सात बार सीधा घुमाते समय आपको मन ही मन यही बोलना है जो उस मंत्र का हिंदी सरलार्थ है।
मंत्र का हिंदी सरलार्थ और मंत्र मैं दोनों मैंने वीडियो में बोल भी दिया है। मैंने उसको उपर लिख भी दिया है। आप इसको पढ़ के आराम से कर सकते हैं।
तो 16 दिन तक आपको यही करना है। अब इस अनाज को आपको क्या करना है? किसी छत पर अपनी आंगन में जहां पक्षी आते हैं वहां पर इसको डाल देना है पक्षियों के लिए।
ऐसी जगह मत डालिए कि 10 दिन पक्षी ही ना आए। बेशक आपको थोड़ा बाहर निकलना पड़े। ऐसी जगह डाल के आइए जहां पर पक्षी इसको उसी दिन खा ले।
16 दिन तक आपको यह प्रयोग करना है। एक तो इस अनाज को पक्षियों को डालना है। रोज दो मुट्ठी अपने ऊपर से सात बार सीधा घुमा के, क्लॉकवाइज घड़ी घूमती है उसी दिशा में घुमा के।
दूसरा आपको वह पानी का गिलास रखना है। मंत्र जाप के बाद इससे सभी पे छींटा दे देना है। चारों रुमालों पे और दीपक पे पांचवा। फिर इसको सूर्य को दे देना है।
21 बार मंत्र को मूल जो उसका मूल भाव है उसमें जाप करेंगे। ओम ह्री…. इस तरह से और 21 बार ही उसका सरलार्थ बोलेंगे, जैसे उसमें मंत्र में बताया गया है यह आपको कर देना है।
अब जब 16 दिन पूरे हो जाएंगे जिस दिन अमावस्या आती है, पितृ पक्ष अमावस्या, सर्वपित अमावस्या, उस दिन आपको इन चारों रुमाल को खोल लेना है। रुमाल खोल लेने के पश्चात चारों भोज पत्र को निकाल लेना है।
दीपक के चार लो आपको जलाने के लिए बोला गया है। अब आपको एक भोज पत्र उठाना है और पहली लो के ऊपर उसको जला देना है। जलाते समय बोलेंगे कि हे हमारे पूर्वजों आज से हम अपना संबंध आपसे विच्छेद करते हैं। आप अगम लोक की यात्रा के लिए निकलिए।
फिर दूसरा उठाना है। फिर जला देना है।
लेकिन इतना ध्यान रखना है जिस पर जो दिशा लिखी हुई है उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम उसी साइड की लो पर जलाना है और उसी भोज पत्र को जलाना है कि आज से हम आपको प्रार्थना करते हैं कि आप आगे की यात्रा के लिए निकल जाइए।
इस तरह एक-एक करके आपको अपने मन से ही छोड़ देना है। क्योंकि अनेक लोग अपने मरे हुए मुर्दे पूर्वजों के अपने रिश्तेदारों के मोह में पड़े रहते हैं। उनको बार-बार याद करते रहते हैं। जिस कारण से वह बेचारे प्रेत योनि में ही पड़े रहते हैं। उनको मुक्ति नहीं मिलती है।
तो ऐसे में आपको एक-एक करके उनको जलाते हुए बोलते चले जाना है। कि हम अपने मन से आपसे संबंध विच्छेद कर रहे हैं। आप अगम लोक की यात्रा के लिए निकलिए।
अगम लोक के बारे में भी समझा देता हूं। या तो नया जन्म ले लीजिए या फिर पितर लोक के लिए रवाना होइए। तो ऐसे करके आपको चारों को जला देना है।
अब चार रुमाल है। इन चारों रुमालों को आपको किसी सुनसान जगह में किसी पेड़ की टहनी पर बांध देना है। एक-एक करके टहनी पर बांधिए। एक दो तीन चार इनको बांधकर आ जाइए।
इस दीपक को आपको जब यह पूरी तरह से निपट जाए इसको यहां से उठा लेना है और इसको आपको कहीं पे विसर्जित कर देना है। कहीं पर कर दीजिए। किसी पेड़ की जड़ पर छोड़ दीजिए।
कहीं कोई पेड़ के पास जैसे मूर्ति होती है, पूजा होती है वहां जाकर इसको जलाकर हाथ जोड़ के कि हे मेरे पूर्वजों आगे की लोक की यात्रा के लिए निकलिए और हमें आशीर्वाद देकर जाइए। इस तरह से आपको कर देना है।
16 दिन तक यह प्रयोग कीजिए। आपके पितर प्रेत योनि से मुक्त हो जाएंगे। इसमें आपको किसी भी बाहरी व्यक्ति, किसी भी बाहरी शक्ति, किसी भी बाहरी ज्ञान की जरूरत नहीं। आप सब से बड़ी आसानी से इसको कर सकते हैं।
इसमें कोई लंबा चौड़ा मैंने खर्च नहीं बताया। लंबी चौड़ी कोई सामान नहीं बताया। सिर्फ चार रुमाल, चार तरह का अनाज, एक दीपक, चार टुकड़े भोज पत्र। इसी से आपका काम हो जाएगा।
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गर्मी हो, सर्दी हो, बरसात हो। अभी देख रहे हो पसीने का हाल कैसे टपक रहा है। फिर भी क्योंकि मैं फैन नहीं चला सकता। नहीं तो आवाज आपको साफ नहीं सुनेगी। मैं एसी नहीं चला सकता क्योंकि उसकी आवाज भी मेरे शब्दों तक रिकॉर्ड होने में दिक्कत देगी।
सामान्य साधना दीक्षा किट क्या हैं?
आप बोलोगे कि गुरु जी यह शब्द सुनाई नहीं दिया, समझ नहीं आया, आवाज खराब थी। इसलिए मेहनत हम बहुत कर रहे हैं आपके लिए। आपको भी हमारा सपोर्ट करना चाहिए।
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आज के लिए इतना ही।
हर हर महादेव।
ओम काली, आदेश गुरु गोरक्षनाथ, सिद्ध योगी गुरु गोरक्षनाथ, सिद्ध योगी गुरु गोरक्षनाथ