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गुरु गोरखनाथ — 11 दिन संकट नाशक साधना

“अलख निरंजन… 🔥

साधकों, प्रणाम।

गुरु गोरखनाथ — नाथ संप्रदाय के आदि गुरु।
सिद्ध योगी जिन्होंने तंत्र, मंत्र और योग —
तीनों को मिलाकर एक ऐसा मार्ग बनाया
जो साधक को भीतर से इतना मजबूत बना देता है
कि कोई भी नकारात्मक शक्ति उसे छू नहीं सकती।

यह 11 दिन की साधना —
किसी को नुकसान पहुँचाने के लिए नहीं है।
यह है — अपनी रक्षा के लिए।
तांत्रिक बाधा, बुरी नज़र, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए।
और स्वयं को इतना सक्षम बनाने के लिए
कि आप अपने परिवार और समाज का भला कर सकें।

गोरखनाथ जी कहते थे —
‘जो स्वयं को जीत ले, वही सिद्ध है।’

चलिए, इस यात्रा को शुरू करते हैं।”


📅 दिन 1 — धूनी स्थापना और शुद्धि

“नाथ परंपरा में पूजा स्थल को ‘धूनी’ कहते हैं।

स्थान चुनें:
घर का शांत कोना — उत्तर या पूर्व दिशा।

शुद्धि विधि:
भभूत (पवित्र राख) — यदि उपलब्ध हो, अन्यथा हल्दी मिश्रित जल।
उस जल से स्थान शुद्ध करें।

वेदी स्थापना:
गोरखनाथ जी का चित्र या खड़ाऊं (पादुका) चिह्न।
एक दीपक — सरसों के तेल का (नाथ परंपरा में प्रिय)।
धूनी के लिए एक छोटा पात्र — उसमें भभूत या राख।
रुद्राक्ष या काली हल्दी की माला रखें वेदी पर।

मन में बोलें —
‘गुरु गोरखनाथ, यह स्थान आपकी छाया में आता है।
यहाँ से हर बुरी शक्ति, हर तांत्रिक बाधा दूर हो।’

आज का नियम परिचय:
सात्विक भोजन, संयमित जीवन, सुबह-शाम साधना।
काले वस्त्र वर्जित नहीं हैं नाथ परंपरा में — लेकिन स्वच्छ वस्त्र अनिवार्य हैं।”


📅 दिन 2 — प्राणायाम और मंत्र परिचय

“नाथ योगियों का मूल अभ्यास है — प्राणायाम और नादयोग।

आज का अभ्यास — उज्जायी प्राणायाम:
गले को हल्का संकुचित करें।
श्वास लें — हल्की सीटी जैसी ध्वनि के साथ।
4 गिनती तक रोकें।
धीरे छोड़ें।
10 चक्र करें।

यह प्राणायाम मानसिक कवच बनाता है —
नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम करता है।

मूल मंत्र:

ॐ गुं गुरुभ्यो नमः।
ॐ नमो आदेश गुरु को।

और गोरखनाथ मंत्र —

ॐ ह्रीं गोरक्षनाथाय नमः।।

अर्थ:
ह्रीं — शक्ति का बीज मंत्र।
गोरक्षनाथाय — जो गौ (इंद्रियों) के रक्षक हैं।
नमः — नमन।

आज केवल सुनें, समझें। कल से जप।”


📅 दिन 3 — संकल्प विधि

“दिन 3 — संकल्प।

हाथ में जल और भभूत की एक चुटकी लें।
आँखें बंद करें।
मेरे साथ दोहराएँ —

‘ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः…

मैं [नाम मन में बोलें]…
आज इस शुभ दिन गुरु गोरखनाथ की
11 दिवसीय साधना का संकल्प लेता/लेती हूँ।

यह साधना मैं करता/करती हूँ —
अपनी और अपने परिवार की तांत्रिक बाधाओं और
बुरी शक्तियों से रक्षा के लिए।
अपने मन और जीवन की शुद्धि के लिए।
और इतना सक्षम बनने के लिए
कि मैं दूसरों के कष्ट दूर करने में सहायक बन सकूँ —
बिना किसी को हानि पहुँचाए।

मैं 11 दिन प्रतिदिन साधना करूँगा/करूँगी।
यह मेरा दृढ़ संकल्प है।
गुरु गोरखनाथ साक्षी हैं।’

जल और भभूत वेदी पर अर्पित करें।

[10 सेकंड मौन रहे ]

गुरु ने सुना। आदेश मिला। यात्रा प्रारंभ।”

15 दिवसीय हनुमान साधना — नकारात्मक ऊर्जा का पूर्ण नाश


📅 दिन 4 — प्रथम जप

“दिन 4 — मंत्र जप प्रारंभ।

माला: रुद्राक्ष या काली हल्दी की माला।

मुद्रा: दाहिने हाथ में माला, अंगूठा-मध्यमा से जप, तर्जनी न छुए।
बायाँ हाथ ज्ञान मुद्रा में घुटने पर।

जप विधि:

पहले गुरु को प्रणाम। संकल्प — ‘108 जप अर्पित।’

ॐ ह्रीं गोरक्षनाथाय नमः।।

जप करते समय भाव रखें —
गुरु गोरखनाथ की सुरक्षा कवच आपके चारों ओर बन रहा है।
कोई भी नकारात्मक शक्ति इस कवच को भेद नहीं सकती।

108 जप — 1 माला। समय लगभग 15-20 मिनट।

जप के बाद माला रखें, प्रणाम करें, भभूत मस्तक पर लगाएँ।”


📅 दिन 5 — जप और सुरक्षा ध्यान

“दिन 5 — जप के साथ Guided Meditation।

पहले 108 जप करें।

अब आँखें बंद रखें। मेरी आवाज़ सुनें —

[GUIDED MEDITATION]

‘श्वास लें… धीरे…
छोड़ें… धीरे…

शरीर शिथिल करें — सिर से पाँव तक…

अब कल्पना करें —
आप एक पर्वत की गुफा के सामने खड़े हैं।
गुफा से धूनी का धुआँ उठ रहा है।
भीतर एक दिव्य प्रकाश है।

गुरु गोरखनाथ धूनी के सामने बैठे हैं।
उनके चारों ओर एक सुनहरा-नारंगी प्रकाश घेरा है।

वे आपको देखते हैं। मुस्कुराते हैं। हाथ उठाकर आदेश देते हैं —
डरो मत। मैं तुम्हारी रक्षा में हूँ।

वह प्रकाश घेरा बड़ा होता है…
और आपको भी अपने भीतर ले लेता है।

महसूस करें —
आपके चारों ओर एक अदृश्य कवच बन गया है।
कोई बुरी नज़र, कोई नकारात्मक शक्ति, कोई तांत्रिक प्रभाव
इस कवच को भेद नहीं सकता।

आप सुरक्षित हैं। आप शक्तिशाली हैं। आप शांत हैं।

5 मिनट इस भाव में रहें…

[5 मिनट शांत संगीत सुने ]

अब धीरे लौटें। हाथ-पाँव महसूस करें। आँखें खोलें।’

आदेश गुरु गोरखनाथ की।”


“पहले 5 दिन पूर्ण हुए।

आपने नींव रखी — स्थान, संकल्प, मंत्र, और सुरक्षा कवच की।

“अलख निरंजन साधकों,

दूसरा भाग प्रारंभ। अब हम गहराई में जाएँगे —
त्राटक से एकाग्रता, हवन से शुद्धि,
और एक विशेष विधि से तांत्रिक बाधा निवारण।”


📅 दिन 6 — त्राटक अभ्यास (शुरुआत)

“त्राटक — एकाग्रता और तीसरे नेत्र की साधना।

विधि:
दीपक की लौ आँख स्तर पर, 2 फीट दूरी।
बिना पलक झपकाए देखें।

दिन 6: 3 मिनट
दिन 7: 5 मिनट
दिन 8: 7 मिनट
दिन 9: 8 मिनट
दिन 10: 10 मिनट

आँखों में पानी आए तो रोकें नहीं — यह शुद्धि है।
त्राटक के बाद आँखें बंद करें, लौ को भृकुटि मध्य में देखें।

त्राटक के बाद आज जप करें — 108 बार मूल मंत्र।”


📅 दिन 7 — गोरखनाथ कवच पाठ

“आज विशेष — गोरखनाथ कवच।

जप के बाद त्राटक करें (5 मिनट)।
फिर यह कवच पढ़ें —

आदेश गुरु का, शीश पर हाथ।
गोरख रक्षा करे, हर रात हर बात।।

भूत प्रेत बाधा टले, तंत्र मंत्र का नाश।
गुरु गोरख की कृपा से, मिटे सकल संत्रास।।

प्रतिदिन इसका पाठ करें — विशेषकर संध्या समय,
जब नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय मानी जाती है।”


📅 दिन 8 — हवन विधि

“दिन 8 — हवन।

सामग्री:
आम की लकड़ी, घी, काले तिल, जौ।
भभूत, कपूर, लोबान।

आहुति मंत्र:

ॐ ह्रीं गोरक्षनाथाय स्वाहा। (108 बार)

प्रत्येक आहुति के साथ —
एक चम्मच घी और तिल अग्नि में अर्पित करें।

मन में भाव रखें —
‘यह अग्नि मेरे भीतर और मेरे आसपास की
हर नकारात्मक ऊर्जा को भस्म कर रही है।’

हवन की भस्म (राख) को संभाल कर रखें —
यह सुरक्षा कवच का प्रतीक बनेगी।”


📅 दिन 9 — बाधा निवारण विशेष विधि

“दिन 9 — विशेष बाधा निवारण अभ्यास।

जप और त्राटक के बाद —

विधि:
हवन की भस्म थोड़ी मस्तक पर, थोड़ी मुख्य द्वार पर लगाएँ।
सात बार मंत्र पढ़ते हुए घर की परिक्रमा करें (मानसिक रूप से भी कर सकते हैं) —

ॐ ह्रीं गोरक्षनाथाय नमः।।

बोलें —
‘गुरु गोरखनाथ, इस घर और इस जीवन से
हर तांत्रिक बाधा, हर बुरी शक्ति का निवारण करें।
यहाँ केवल आपकी सुरक्षा और शुभता का वास हो।’

यह विधि अत्यंत प्रभावी मानी जाती है —
श्रद्धा और नियमितता के साथ करें।”


📅 दिन 10 — दूसरे चरण की पूर्णाहुति

“दिन 10 — आज का पूर्ण क्रम:

प्राणायाम, 2 माला जप, त्राटक 10 मिनट,
गोरखनाथ कवच पाठ, हवन का स्मरण, ध्यान 10 मिनट।

कल — दिन 11 — साधना का समापन होगा।
आज डायरी में लिखें — इन 10 दिनों में क्या अनुभव हुआ।”


📹 दिन 11 — समापन भाग

“पूर्णाहुति और जनकल्याण के निर्देश”


“अलख निरंजन साधकों,

आज 11वाँ और अंतिम दिन।

आज का दिन दो भागों में है —
पहला — साधना की पूर्णाहुति।
दूसरा — आगे के जीवन के लिए गुरु गोरखनाथ का मार्गदर्शन।”


🔶 भाग A — पूर्णाहुति विधि

“आज पूर्ण क्रम करें —

प्राणायाम 10 मिनट।
3 माला जप — 324 बार मूल मंत्र।
त्राटक 10 मिनट।
गोरखनाथ कवच — 3 बार पाठ।
विशेष हवन — 108 आहुति।

अंतिम आहुति में बोलें:

‘हे गुरु गोरखनाथ,
इस 11 दिन की साधना को स्वीकार करें।
मुझे हर बुरी शक्ति, हर तांत्रिक बाधा से सदा सुरक्षित रखें।
मुझे इतनी शक्ति और समझ दें
कि मैं अपने परिवार और समाज के लिए
सकारात्मक सहायक बन सकूँ — बिना किसी को हानि पहुँचाए।
आदेश… आदेश… आदेश…’


🔶 भाग B — गुरु गोरखनाथ का संदेश (जनकल्याण के लिए सही मार्ग)

“साधकों, अब एक बहुत जरूरी बात।

आपमें से कुछ लोग यह साधना इसलिए कर रहे हैं
क्योंकि आप दूसरों के कष्ट दूर करना चाहते हैं।
यह बहुत सुंदर इच्छा है।
गुरु गोरखनाथ खुद इसी भाव के प्रतीक हैं —
लोक कल्याण के योगी।

लेकिन नाथ परंपरा का सबसे बड़ा सिद्धांत है —

‘पहले स्वयं को सिद्ध करो, फिर सेवा करो।’

इसका अर्थ है —

पहला नियम — कभी शक्ति का व्यापार न करें।
यदि आप किसी का कष्ट दूर करना चाहते हैं —
तो वह सेवा है, व्यवसाय नहीं।
गुरु गोरखनाथ ने कभी सिद्धियों को बेचा नहीं —
उन्होंने उन्हें जिया।

दूसरा नियम — डर दिखाकर मदद न करें।
‘बुरी नज़र है’, ‘काला जादू हुआ है’ कहकर
लोगों को भयभीत करना —
यह नाथ परंपरा नहीं, यह शोषण है।
सच्चा सहायक — शांति देता है, भय नहीं।

तीसरा नियम — किसी का अनिष्ट करने की शक्ति कभी न माँगें।
84 सिद्धों की शक्ति इसलिए नहीं मिलती
कि आप किसी को नुकसान पहुँचाएँ —
बल्कि इसलिए मिलती है
कि आप खुद इतने सक्षम हों
कि आपको किसी और को हानि पहुँचाने की
जरूरत ही न पड़े।

चौथा नियम — विनम्रता सबसे बड़ी सिद्धि है।
जो साधक कहता है — ‘मेरे पास शक्ति है, देखो’
वह अभी सिद्ध नहीं हुआ।
जो साधक चुपचाप, बिना दिखावे के
किसी का भला कर देता है —
वही सच्चा नाथ है।

अगर आप वाकई जनकल्याण करना चाहते हैं —
तो यह करें —

किसी दुखी व्यक्ति को सुनें — बिना जज किए।
किसी डरे हुए व्यक्इ को हिम्मत दें — डराकर नहीं।
अपनी साधना की शांति और स्थिरता को
अपने व्यवहार में दिखाएँ।

यही असली ‘दरबार’ है —
जहाँ कोई डर न हो, कोई शोषण न हो —
केवल करुणा और सेवा हो।

“साधकों,

11 दिन की यह यात्रा पूर्ण हुई।

आपने अपने लिए एक सुरक्षा कवच बनाया।
आपने अपने मन को शुद्ध किया।
और आपने सीखा —
सच्ची शक्ति, दिखावे में नहीं —
सेवा और विनम्रता में है।

अब प्रतिदिन कम से कम 1 माला जप जारी रखें।
गोरखनाथ कवच का पाठ करते रहें।

और जब भी किसी की सहायता करें —
बिना किसी मूल्य के,
बिना किसी को भयभीत किए,
केवल करुणा से करें।

यही गुरु गोरखनाथ का सच्चा आदेश है।

अलख निरंजन।
आदेश गुरु गोरखनाथ की।
जय बाबा गोरखनाथ।”