भारतीय लोक-आस्था और तांत्रिक परंपराओं में कई ऐसी देवियाँ और शक्तियाँ वर्णित हैं जो विशेष स्थानों और परिस्थितियों से जुड़ी होती हैं। उन्हीं में से एक हैं माता मसानी। उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में माता मसानी को श्मशान तंत्र और अदृश्य शक्तियों की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।
लोकमान्यता के अनुसार यदि किसी स्थान या व्यक्ति पर नकारात्मक ऊर्जा, प्रेत बाधा या अनिष्ट प्रभाव हो जाए, तो माता मसानी की पूजा और शांति से उस प्रभाव को समाप्त किया जा सकता है। इस लेख में हम माता मसानी को शांत करने के महत्व, कारण और सरल पूजा विधि के बारे में विस्तार से जानेंगे।
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माता मसानी कौन हैं?
लोक परंपराओं में माता मसानी को श्मशान की देवी माना जाता है। “मसानी” शब्द का संबंध “श्मशान” से माना जाता है, इसलिए इनका निवास स्थान भी श्मशान भूमि या वीरान स्थान बताए जाते हैं। कई साधक और ग्रामीण समुदाय मानते हैं कि माता मसानी उन आत्माओं और शक्तियों की अधिपति हैं जो भटकती रहती हैं।
जब किसी व्यक्ति पर अचानक अनजानी बीमारी, डर, बुरे सपने, मानसिक बेचैनी या लगातार बाधाएँ आने लगती हैं, तो कई लोग इसे मसानी माता के क्रोध या नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव मानते हैं। ऐसी स्थिति में माता मसानी की शांति करवाई जाती है।
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माता मसानी को शांत करने की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
कई लोक परंपराओं में यह विश्वास है कि कुछ विशेष कारणों से माता मसानी अप्रसन्न हो सकती हैं, जैसे –
- श्मशान या वीरान स्थान का अपमान करना (पेशाब या शौच कर देना)
- माता मसानी के स्थान की पवित्रता को भंग करना
- किसी साधना या तांत्रिक क्रिया में गलती होना
- पूर्वजों या अदृश्य शक्तियों का असंतोष
- किसी व्यक्ति पर प्रेत बाधा या नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव
ऐसी स्थिति में व्यक्ति के जीवन में समस्याएँ बढ़ सकती हैं। इसलिए अनुभवी साधक या तांत्रिक माता मसानी को शांत करने की विशेष साधना या उपाय करवाते हैं।
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माता मसानी को शांत करने की पारंपरिक विधि
माता मसानी की शांति के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग विधियाँ प्रचलित हैं, लेकिन सामान्य रूप से निम्न प्रक्रिया अपनाई जाती है।
1. शुभ दिन का चयन
आमतौर पर मंगलवार, शनिवार या अमावस्या का दिन इस पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है। कई साधक मध्यरात्रि के समय भी यह पूजा करते हैं।
2. माता का आह्वान
पूजा के समय साधक माता मसानी का आह्वान करते हैं और उनसे प्रार्थना करते हैं कि वे क्रोध छोड़कर कृपा प्रदान करें। मंत्रों और प्रार्थना के माध्यम से देवी को शांत किया जाता है।
3. क्षमा प्रार्थना
पूजा के अंत में साधक माता से क्षमा मांगते हैं और उनसे परिवार तथा घर की रक्षा करने की प्रार्थना करते हैं।
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माता मसानी को शांत करने का मंत्र:
“ॐ नमः आदेश गुरुजी, आदेश!
जय हो माई मदानण आगे तेरे वीर सबल सिंह पीछे पीर बादशाह चले।
तीन सौ साठ मसानी दातिये सदा तेरी सेवा में रहे।
तीन लोक नौ खंड की तुम हो सृजन हार।
जागो माँ जागो, आदिशक्ति माई मदानण चौगान की रानी।
जहाँ को भेजूँ, वही को जाए, दुःख संकट से ले बचाए तो मदानण कहाए।
चलै वाचा, फलै वाचा, देखूं मदानण माई तेरे इल्मी शक्ति का तमाशा।
फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा। मेरे गुरु का शब्द सांचा। आ मेरे काज सवार!”
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विधि इस प्रकार हैं:
इस मंत्र का जाप किसी भी मंगलवार या शनिवार या अमावस्या से शुरू कर सकते हैं… अपनी श्रद्धा अनुसार घी या तेल का दीपक जलाएं…. धूप जलाएं , पहले और आखरी दिन चौगान या किसी सुनसान जगह पर पांच लड्डू… दो पतासे… दो इलायची, यह शाम को 8:00 बजे के बाद रखना है, और मंत्र जाप भी 8:00 बजे के बाद करना है रात्रि में। जाप 41 दिन तक करना है….. हर रोज 54 बार पढ़े।
हर शनिवार 5 मंत्र का हवन करना… 1 बार मन्त्र जपकर 2 लौंग, एक मिश्री की आहुति देनी होती हैं … साधना पूरी होने के पश्चात अपनी श्रद्धा अनुसार हवन व दानपुन्य करें…… माता की कृपा आप पर बनी रहेगी..
जय माता रानी की।
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शनिवार के 3 उतारे होंगे
2 रोटी कच्ची पक्की मीठी नमकीन, 1 जायफल, 7 मिठाई के पीस, 1 नींबू, 1 देशी का पव्वा, 2 कच्चे अंडे, 1 सिगरेट
एक रोटी में आपको चीनी मिल लेना है दो चुटकी…….. दूसरी रोटी में आपको नमक और मिर्च के चुटकी डाल लेना है…… तो यह नमकीन हो जाएगी…… अब आपको इसको रोटी बनाकर तवे पर डाल लेना है.. लेकिन इसको पलटना नहीं है… बस एक साइड से पका लेना है
इसको पका लेने के पश्चात इनको उतार लीजिए और कच्ची साइड आप सरसों का तेल लगाइए और एक टीका सिंदूर का कीजिए….. एक टीका आप काजल का कीजिए और इस सारे सामान को अपने और परिवार के सब लोगों के सिर से 7 बार उल्टा घूमाकर (एंटी क्लॉक वाइज) और इसको काला कपड़ा में बांधकर, कहीं पर सुनसान जगह पर वीरान जगह पर… बाहर रखकर आना है..
वहां पर बोलना है कि हे माता मशानी, मुझे गुरु योगी आनन्द जी ने भेजा हैं …. अपना भोग स्वीकार करो और जो भी मेरे साथ नेगेटिव शक्ति है सबको पकड़कर यही बांध लो मैं अगले शनिवार भोग लेकर फिर से आऊंगा
उतारा करने जाते समय न किसी से बोलचाल करनी हैं न ही पीछे मुडकर देखना हैं … वापिस आने पर घर में घुसने से पहले अपने हाथ, पैर और मुंह धो लेना हैं …
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माता मसानी की पूजा के संभावित लाभ
माता मसानी की शांति करने से लोक विश्वास के अनुसार कई प्रकार के लाभ प्राप्त हो सकते हैं, जैसे –
- नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा
- प्रेत और सभी प्रकार के तंत्र बाधा से राहत
- घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा
- मानसिक भय और तनाव में कमी
- जीवन में आने वाली बाधाओं का कम होना
हालांकि यह पूरी तरह आस्था और विश्वास पर आधारित होता है।
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पूजा करते समय सावधानियाँ
माता मसानी की पूजा को एक शक्तिशाली तांत्रिक परंपरा माना जाता है, इसलिए कुछ सावधानियाँ रखना आवश्यक है।
- बिना ज्ञान के तांत्रिक प्रयोग नहीं करना चाहिए
- अनुभवी साधक या गुरु के मार्गदर्शन में ही पूजा करें
- किसी को नुकसान पहुँचाने की भावना से साधना नहीं करनी चाहिए
- श्रद्धा और शुद्ध मन से पूजा करनी चाहिए
ऐसा माना जाता है कि सच्ची श्रद्धा और सकारात्मक भावना से की गई पूजा ही फलदायी होती है।
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निष्कर्ष
माता मसानी की पूजा और शांति भारतीय लोक परंपरा और तांत्रिक साधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। कई लोग इसे नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा और मानसिक शांति प्राप्त करने का माध्यम मानते हैं।
यदि किसी व्यक्ति को लगातार अज्ञात बाधाओं या भय का अनुभव हो रहा हो, तो माता मसानी की शांति के लिए पूजा या उपाय करवाना एक आध्यात्मिक समाधान माना जाता है।
हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि किसी भी प्रकार की साधना या पूजा हमेशा सही मार्गदर्शन और श्रद्धा के साथ ही करनी चाहिए।
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Jai gurudev ji
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