नवरात्रि में कलश स्थापना विधि – संपूर्ण मार्गदर्शिका
नवरात्रि हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली पर्व है, जिसमें माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस पर्व की शुरुआत कलश स्थापना (घट स्थापना) से होती है, जिसे बहुत ही शुभ और आवश्यक माना गया है। यह स्थापना शक्ति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होती है। यदि इसे विधिपूर्वक किया जाए, तो घर में सुख-शांति और देवी कृपा का वास होता है।
🌼 कलश स्थापना का महत्व
कलश को भगवान विष्णु, ब्रह्मा और माँ दुर्गा का प्रतीक माना जाता है। इसमें स्थापित जल जीवन का आधार है और नारियल को देवी का स्वरूप माना जाता है। नवरात्रि में कलश स्थापना करने से घर में दिव्य ऊर्जा का संचार होता है और सभी नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
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🪔 कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री
कलश स्थापना से पहले निम्नलिखित सामग्री एकत्र कर लें:
- मिट्टी का या तांबे का कलश
- स्वच्छ मिट्टी
- जौ (बार्ली)
- नारियल (लाल कपड़े में लिपटा हुआ)
- आम या अशोक के पत्ते
- गंगाजल या शुद्ध जल
- मौली (कलावा)
- सुपारी, लौंग, इलायची
- पंचरत्न (यदि संभव हो)
- लाल कपड़ा
- चावल (अक्षत)
- हल्दी, कुमकुम
- दीपक और अगरबत्ती
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🕉️ कलश स्थापना की विधि
1. शुभ मुहूर्त का चयन
नवरात्रि के पहले दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त या अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना श्रेष्ठ माना जाता है। अब बात करें नवरात्र के सबसे महत्वपूर्ण कार्य यानी कलश स्थापना की, तो इसका शुभ समय 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.
2. पूजा स्थान की तैयारी
घर के उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में एक साफ स्थान चुनें। वहां लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं।
3. जौ बोना
चौकी पर मिट्टी फैलाएं और उसमें जौ बो दें। यह समृद्धि और उन्नति का प्रतीक है। प्रतिदिन इसमें हल्का जल डालें।
4. कलश की स्थापना
- कलश में गंगाजल या शुद्ध जल भरें
- अब उसके ऊपर हल्दी का लेप करे और सिंदूर से स्वास्तिक बनाए
- उसमें सुपारी, लौंग, इलायची, अक्षत, हल्दी की 2 गाँठ और रूपये का सिक्का डालें
- कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें
- ऊपर नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर रखें
- कलश पर मौली बांधें
5. संकल्प लें
अपने दाहिने हाथ में जल में, 1 चुटकी हल्दी और चावल डालकर माँ दुर्गा, काली, शीतला या अपनी कुलदेवी (जिसकी भी आप साधना कर रहे हैं) का ध्यान करते हुए संकल्प लें कि हे माता मैं (अपना नाम) पिता या पति का नाम, अपना गोत्र, दिन, समय और जगह का नाम बोले, आज संकल्प लेता हूँ कि इस नवरात्रि आपकी साधना करूँगा,
अब अपना उदेश्य बोलेंगे…. जैसे, सुख शांति के लिए कर रहे हैं, या शक्ति प्राप्ति, बीमारी ठीक करने , या धन सम्पत्ति पाने के लिए,, जो भी उदेश्य हैं वह बोले…. फिर अपने साधना का 10% हिस्सा अपने गुरूजी को समर्पित करे, 10% हि अपने घर के पितरो को समर्पित करे बाकी 80% उन्ही को समर्पित करे जिनकी आप साधना कर रहे हैं
इतना करके अब आपको बोलना हैं यदि इस साधना में भूल चुक हो जाये तो मुझे बच्चा समझकर क्षमा भी करे …. इस प्रकार आपको श्रद्धा और भक्ति से नवरात्रि व्रत (अपनी क्षमतानुसार एक दिन, दो, पांच, सात या नौ दिन) और पूजा साधना जप करेंगे।
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6. देवी का आवाहन
माँ दुर्गा, काली या अपनी कुलदेवी का ध्यान करें और उन्हें अपने घर में विराजमान होने का निमंत्रण दें। दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती से पूजा करें।
ध्यान करते समय यह श्लोक मंत्र 7 बार बोलेंगे
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
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मंत्र साधना और भोग
आपको रोज माता को भोग देना हैं …. भोग में दूध से बनी मिठाई महत्वपूर्ण होती हैं … इसको कपूर या उपले की आग जलाकर आहुति देंगे ….. सबसे पहले इन 12 देवताओ को मिठाई का थोडा थोडा तोडकर अग्नि पर भोग दीजिये

….
अब जिन भी शक्ति की साधना कर रहे हैं उनके नाम से 3 बार आहुति देंगे ….. खुद भी इनके नाम से उसी में से मिठाई ग्रहण करेंगे ….. और बोलेंगे हे देवी मेरे भीतर विराजमान होकर यह भोग स्वीकार करे … मुझे अपनी शक्तियां प्रदान करे …
इसके बाद मंत्र जप करना शुरू करे …. मंत्र कम से कम 21 माला, 51 माला या 108 माला करना चाहिए, रोज जप का 10% हवन भी करे ….. अग्नि पर लौंग मिश्री (खड़ी शक्कर) की आहुति दे …. जैसे 21 माला जप कर रहे हैं तो 2 माला का हवन करे ..
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मंत्र:
कुलदेवी: ॐ क्रीं कुलदेविये नम: (जिन्हें अपनी कुलदेवी के नाम का नहीं पता वो यह मंत्र जपे)
माता दुर्गा: ॐ दूं दुर्गाये नम:
माता शीतला: ॐ श्री ह्रीं शीतलाए नम:
माता काली: ॐ क्रीं कालिकाये नम:
मसानी का मन्त्र: ॐ ह्लीं क्लीं ऐं मसानी महामाये भूत प्रेत बाधा नाशिनि किलि किलि फट स्वाहा॥
शक्ति मन्त्र: ॐ ऐ कली सौ
नोट: इनमे से अपने अनुसार जिस शक्ति की साधना करनी हैं उसका मंत्र को चुन लेंगे
पूजा के कपड़े आपको अलग रखने हैं … अगर सम्भव हो तो रोज क्रमानुसार कपड़े पहनने हैं जो कि निचे बताये गये हैं …. अगर पूरी तरह इन रंगो के वस्त्र नहीं हैं तो पुरुष गमछा और स्त्री उसी रंग की चुनरी ओढकर साधना कर सकते हैं
- दिन 1 (मां शैलपुत्री): सफेद – पवित्रता और शांति।
- दिन 2 (मां ब्रह्मचारिणी): लाल – प्रेम और ऊर्जा।
- दिन 3 (मां चंद्रघंटा): रॉयल ब्लू (शाही नीला) – शांति और दृढ़ता।
- दिन 4 (मां कुष्मांडा): पीला – खुशी और सकारात्मक ऊर्जा।
- दिन 5 (मां स्कंदमाता): हरा – विकास और उर्वरता।
- दिन 6 (मां कात्यायनी): स्लेटी (ग्रे) – संतुलन और नकारात्मकता का अंत।
- दिन 7 (मां कालरात्रि): नारंगी (ऑरेंज) – रचनात्मक ऊर्जा और उत्साह।
- दिन 8 (मां महागौरी): मोरपंखी हरा (पीकॉक ग्रीन) – करुणा और ताजगी।
- दिन 9 (मां सिद्धिदात्री): गुलाबी – स्नेह और सामंजस्य।
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🌸 कलश स्थापना के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
- स्थापना के समय मन और शरीर शुद्ध होना चाहिए
- पूजा स्थल को साफ और शांत रखें
- नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाना शुभ माना जाता है
- जौ को रोजाना जल देना न भूलें
- पूजा में सच्ची श्रद्धा और भक्ति सबसे महत्वपूर्ण है
🔱 कलश विसर्जन विधि
नवरात्रि के नौवें या दसवें दिन (अष्टमी/नवमी या दशमी) को कलश का विसर्जन किया जाता है।
- सबसे पहले देवी की विधिपूर्वक पूजा करें
- जौ को नदी या बहते जल में प्रवाहित करें या गमले में डाल सकते हैं
- कलश के जल को घर में छिड़क दें या तुलसी में अर्पित करें
✨ निष्कर्ष
नवरात्रि में कलश स्थापना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने का एक माध्यम है। यदि इसे सही विधि और श्रद्धा के साथ किया जाए, तो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। माँ दुर्गा की कृपा से सभी बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।
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प्रणाम गुरुजी,
नवरात्रि के पावन पर्व पर सर्वप्रथम आपके श्रीचरणों में सादर नमन । आपके द्वारा दी गई ये जानकारी निश्चित ही हम सब के लिए और आमजन के लिए अत्यंत लाभप्रद है । इसके लिए आपको बहुत बहुत साधुवाद।
यशस्वी भव:
प्रणाम गुरुजी
🙏🙏🚩🚩🙏🙏
ॐ शिव गोरक्ष
आशीर्वाद